हरियाणा विधानसभा से पारित पुलिस एक्ट सुप्रीम कोर्ट में खारिज, DGP बीएस संधू को फिर मिल सकता है सेवा विस्तार

चंडीगढ़: पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति में हरियाणा सरकार की नहीं, बल्कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की चलेगी। डीजीपी के चयन की पॉवर अपने हाथ में लेने की प्रदेश सरकार की कोशिश पर पानी फेरते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पुलिस कानून में हुए बदलाव को खारिज कर दिया है। अब प्रदेश सरकार को नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल यूपीएससी को भेजना पड़ेगा, जिनमें से किसी एक को इस पद पर लगाया जाएगा।
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हरियाणा के साथ ही पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार की सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट के पिछली 3 जुलाई के आदेशों में बदलाव करने की मांग करते हुए याचिका लगाई थी। स्थानीय नियमों के हिसाब से डीजीपी की नियुक्ति की याचिका का निपटारा करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने के लिए जनहित में यह आदेश दिया गया था। प्रदेश सरकार डीजीपी के लिए पात्र तीन अफसरों की सूची यूपीएससी को भेजे।
न्यायालय की गाइडलाइंस के मुताबिक चूंकि प्रदेश सरकारों को डीजीपी की सेवानिवृत्ति से तीन महीने पहले नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजनी होती है। ऐसे में मौजूदा डीजीपी बीएस संधू को फिर से तीन महीने का सेवा विस्तार फिर से मिल सकता है।